Founder - Pt. Satyendra Mishra

स्वर्गीय पंडित सत्येंद्र मिश्र

Founder, Ganga Seva Nidhi

Founder's Message

A Lifetime Dedicated to Maa Ganga & Kashi

स्वर्गीय पंडित किशोरी लाल मिश्र के कनिष्ठ पुत्र स्वर्गीय पंडित सत्येंद्र मिश्र गोदावरी जलधारा के उत्तर तट पर गंगा गोदावरी संगम ( D17/111 श्री राम मंदिर में 21 जनवरी 1951 को हुआ)

विश्व की एक मात्र नगरी या जिवंत नगरी जिसकी जीवन रेखा सृजना के प्रथम दिन से लेकर वर्तमान तक अटूट है अपने आप में कई एतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरोधाभासों की मूर्त प्रतिनिधि है| काशी में देवी सुरेश्वरी माँ गंगा प्रवाहित हैं उत्तर वाहिनी स्वरुप में | तीन विशाल पर्वत शिखरों को अपने बाम तट पर रखकर गंगा यहाँ आत्मावलोकन (Entrospection) करती हैं | विभिन्न काल खण्डों में विकसित काशी मोक्ष की नगरी है | Kashi grants salvation i.e. permanent detachment from the cycle order of Birth and Rebirth i.e. a state of desire less Ness or alternative less Ness.

इस अद्भुत आध्यात्मिक तथा भौतिक वास्तविकता के बीच पंडित सत्येंद्र मिश्र जी का बाल्यकाल कुछ यूँ विकसित हुआ कि गृह देवता प्रभु राम चन्द्र करुणा अवतार बन गए साथ ही काशी अधिष्ठाता भगवान शिव अभिन्न हो गए और शायद यही कारण था अपने जटाओं में गंगा धारण किए भगवान शिव तथा प्रभु राम चन्द्र जी की कुल देवी माँ गंगा अति वृद्ध पितामही की तरह सत्येंद्र जी को असामयिक मातृ वियोग के उपरांत ना केवल माँ की आंचल बनतीं थी संस्कार देती थी सर्वोपरि आगे बढ़ने की प्रेरणा देती थीं परिणाम गंगा कृपा से निखरे कबीर दास जी, तुलसी दास जी, भारतेंदु हरिश्चंद्र, मुंशी प्रेम चंद्र, जयशंकर प्रसाद जी, सरीखे रचना कारों से समृद्ध हिन्दी साहित्य के ओर जहां सत्येंद्र जी को आकर्षित किया |

परास्नातक किया वहीँ माँ गंगा की आंचल उनकी खेल कूद की आँगन बनी राष्ट्रीय स्तर तक विभिन्न तैराकी प्रतियोगिताओं में उन्हें गंगा जी के प्रदूषण के खिलाफ अधिक सजग होने को प्रेरित किया |

विभिन्न काल खण्डों में माँ गंगा के साथ काशी में जीवन के अन्य कई विषयों का समावेश हुआ | आदि गुरु शंकर ने यही रचना की- देवी सुरेश्वरी भगवती gange पंडित राज जगन्नाथ लिखे- गंगा ममाङ्गान्यमली करोतु, कवि केशव ने लिखा- हे भागीरथी हम दोष भरे, है भरोस यही की पड़ोस तिहारे... साथ ही साथ काशी राष्ट्रभक्ति एवं आध्यात्मिक भाव संवर्धन हेतु सत्येंद्र जी के मन में जो निश्कर्ष हीनता की स्तिथि रही उसे गत शताब्दी के नौवें दशक में एक समाधान मिली दैनिक माँ गंगा की आरती उन्होंने आरंभ किया एक आरती कालक्रम में सात आरती तथा विशेष उपलक्ष एक्सिस आरती के रूप में विकसित हो गई | साथ ही राष्ट्रभक्ति की एक अमूल्य धारा काशी के सनातन परंपरा के साथ साथ गंगा सेवा निधि के रूप में संकल्पित स्थापित एवं विकसित हुआ |